इस वर्तमान कहीं कुछ बदला हुआ दिखा आपको।
हादसे फिर होंगे,जांच फिर चलेगी, गवाही फिर होगी,
तारीखें चींख-चींख बुलाएंगी और फिर अगली आ जाएगी।
कहते हैं उम्मीद तो है न्याय मिलेगा ही, भरोसा है हमको,
लेकिन अब से तब जाने कितना कुछ ‘नया’ हो चुका होगा।
इस दरमयान जाने कितनी पढ़ियां दुनिया में आ चुकी होंगी,
अदालतों में जाने कितनी फाइलों पर धूल पड़ चुकी होगी।

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